कभी खुशी तो कभी गम नया दे जाती है,
होंठों पे हँसी, आँखों मे नमी होती है,
जब कभी तेरी याद आती है ।।
लम्हा- लम्हा टूटना है मुझे, टूटे के बिखरना है,
जोड़ कर खुद से ये तन्हा मुझे कर जाती है ,
जब कभी तेरी याद आती है ।।
काली रात में काली घटाओं सी तन्हाई है,
मिल जाती है चाँद की झलक ,
जब कभी तेरी याद आती है ।।
रास्ते धूंधला गए है मंज़िलों पर आकर,
मंज़िले तो अब तुझमे ही नज़र आती है,
जब कभी तेरी याद आती है ।।
आधे अधूरे अल्फाज़ लब ख़ामोश है मेरे ,
कह जाते है सब बिन बोले ,
जब कभी तेरी याद आती है ।।
लिखने को आज भी कुछ नही "चौहान" कलम से मेरी,
पर नज़्म रोज़ नई बन जाती है ,
जब कभी तेरी याद आती है ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
Vry good dear
ReplyDeleteThanks 😊😊
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