Saturday, 9 February 2019

"वो लौट आएगी" (WO LAUT AAYEGI)


पागल दिल ज़िद्द लिए बैठा है कि वो लौट आएगी,
टूटा है पर उम्मीद लिए बैठा है कि वो लौट आएगी।।

बार बार आजकल देखता हूँ हाथ की लकीरें अपनी,
कहता है तकदीर लिए बैठा है कि वो लौट आएगी।।

चिंगारी तो अब भी बाकी होगी दिल में मेरे इश्क़ की,
भड़कने दो ज़रा दहकने दो यकीनन वो लौट आएगी।।

फिर तेरे सहारे की ज़रूरत होगी उसे तन्हाई में,
माथे को चूम सीने से लगा लेना जब वो लौट आएगी।।

शिकायतें भी होंगी उसे तो कई शिक़वे भी होंगे तुम्हे,
ख़ामोशी से सब भुला देना जब वो लौट आएगी।।

यकीन इस कदर पक्का हो चला मेरे दिल का "चौहान",
पानी पर पानी से लिख नाम कहता है वो लौट आएगी।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

No comments:

Post a Comment

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...