Friday, 22 February 2019

"बात तो वही है" (BAAT TO WAHI HAI)


दिन से रात है ,रात से दिन वही है,
बदला तो खुद को पर हालात तो वही है।।

कभी उनसे होती थीआज तस्वीरों से,
एक तरफा ही सही पर बात तो वही है।।

कभी साथ वो थी आज तन्हाई है,
आंखें नम तो क्या रात तो वही है।।

गर कर ही लिया इरादा इश्क़ के अंजाम का,
फिर मिट्टी मिले या कफ़न बात तो वही है।।

जब कभी समझ ही नही पाए जज़्बात तुम मेरे,
स्याही से लिखूं या फिर खून से बात तो वही है।।

दीदार-ए-हसरत जब क़ब्र तक ले आई "चौहान",
मिलने हिज़ाब में आये या बेहिज़ाब बात तो वही है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

2 comments:

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...