Saturday, 5 January 2019

"दूर तुझसे" (DOOR TUJHSE)


जा रहा हूँ दूर तुझसे,
याद आये तो फ़िज़ाओं में महसूस करना,
लौट आऊंगा खुशबू बनके,
बस अपनी साँसों में घुलने देना..

जा रहा हूँ दूर तुझसे,
इन घटाओं में महसूस करना,
बरस जाऊंगा बारिश बन के,
बस खुद पर बरसने देना,

जा रहा हूँ दूर तुझसे,
इन हवाओं में महसूस करना,
लौट आऊंगा तुझको छुने,
बस इन गेसुओं से गुजरने देना,

जा रहा हूँ दूर तुझसे,
अपने दिल मे महसूस करना,
बस जाऊंगा आंखों में,
अश्क़ों के बहाने ना निकाल देना,

जा रहा हूँ दूर तुझसे ,
इन लफ्ज़ों में महसूस करना,
उतर जाऊंगा कागज़ पर तेरे दिल के,
जला के राख मत कर देना,

जा रहा हूँ दूर तुझसे,
हो सके तो याद मत करना,
कमी महसूस हो कभी जो "चौहान"की,
खुद को उदास मत करना,
लौट कर नही आते जाने वाले दुनिया से,
रात भर शमशानों में तलाश मत करना,
बस। समझा लेना अपने मन को,
मेरे आने की अब कभी आस मत करना।।
जा रहा हूँ दूर तुझसे।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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