अक्सर मेरी तन्हाई मुझसे रूठ जाती है.....
उसे शिकायत है मुझसे,
मैं उसके साथ क्यों नहीं रहता,
उससे बात क्यों नहीं करता।।
पर कुछ पल के लिए जब कोई साथ आता है,
खामोश रहकर भी सब कुछ कह जाता है।।
तो लगता है कि अब मुझे तन्हाई की जरूरत नहीं
इससे ज्यादा और कोई खूबसूरत नहीं ।।
सपने देखने लगता हूं उसका साथ निभाने के ,
उसके साथ अपनी पूरी दुनिया बसाने के ।।
पर मैं अनजान था कि उसके कई किरदार है ,
मैं पहला प्यार नहीं उसके और भी प्यार हैं।।
मैं तो खिलौना था कुछ पल खेला और तोड़ दिया ,
जब जी भर गया मुझसे तो अकेला छोड़ दिया ।।
तमाम कोशिश करता रहा मैं रिश्ते बचाने के लिए,
और वह रोज बहाने ढूंढती थी मुझसे दूर जाने के लिए।।
मैं पूछता हूँ उससे मेरी खता क्या है ।
मुझसे दूर जाने की वजह क्या है।
उसने कहा जो ढूंढती हूं तुझमें वो बात नहीं है,
अब हमारे मिलते ख्यालात नहीं हैं।।
तुम मुझे खुश रख सको ये तो बहुत दूर की बात है,
मेरे साथ खड़े होने की तेरी औकात नहीं है ।
मैं यह सुनकर लौट आया टूटे दिल के साथ,
हां शायद मुझ में नहीं थी वो बात।।
यह सब सुनकर के रो रहा मेरा जमीर था
पैसे से नहीं पर मैं दिल से तो अमीर था ।।
अब लौट आया हूं वापस अपने तन्हाई के लिए,
शुक्रिया ऐ मेरे दोस्त तेरी बेवफाई के लिए।।
अब तो ज़िद्द है "चौहान" इस हद तक गुज़र जाऊंगा,
लाख फरियादें करे तो भी लौट के ना आऊँगा।।
जिसे चाहा अपना वजूद भूल कर वो तो अपना ना हुआ,
पर हाँ एक दिन मैं तन्हाइयों का हो ही जाऊंगा।।
तन्हाई के साथ बातें करूंगा उसका साथ निभाऊंगा,
इस तरह खो जाऊंगा तन्हाई में, एक दिन मै भी तन्हा हो जाऊंगा।।
BY :-
WELSON WEKA
(MY LOST BOOK)
ADDITIONAL:-
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Bht hi kamal ka likha h bhai...
ReplyDeleteThanks alot dear 😍😍
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