Friday, 18 January 2019

"बातें प्यार की" (BAATEN PYAR KI)



सिर्फ़ क़िताबों में लिखने की नही होती, बातें प्यार की,
सिर्फ़ आंखों की हसरत नही होती, किसी के दीदार की,
मेरे लफ्ज़ों में रूहानियत नही पर एहसास है,
बस दो कदम चलने से नही मिलती मंज़िलें प्यार की।।

मेरे ख्वाबों में तस्स्वुर है मेरे अहबाब का,
मेरे दिल-ए-अंजुमन में बसेरा है मेरे यार का,
मेरे चश्में-पूर्ब से झलकता एक अबसार है,
बस ख्वाईशें है इस बिबियान में बर्गो बहार की,
बस दो कदम चलने से नही मिलती मंज़िलें प्यार की।।

ये स्याही नही मेरी तहरीर के अश्क़ है जो बह निकलते है,
ये उनसे मिले ज़ख़्मों के हिसाब माँगने निकल पड़ते है,
मेरे इश्क़ का ये फैसला इन किताबों में बरकरार है,
"चौहान" के अल्फ़ाज़ों में ख्वाईशें है तेरे इकरार की ,
बस दो कदम चलने से नही मिलती मंज़िलें प्यार की।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।



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