हदों में है पर हदों से परे है,
जो लहू बन मेरी रगो में घुल है,
सच्चा है इसका हरपल ,
एक पल भी ना धोखा है,
मुझे तुमसे है तो तुम्हे किसी और से,
देख मेरा इश्क़ कितना अनोखा है।।
आग सी तपन भी है तो,
पानी सी ठंडक भी,
सुबह सी चमक भी है तो,
शाम की ललक भी,
इसके दर्द में मिलता मुझे आराम है,
तू पुछती है मुझसे,
कैसा ये प्यार है,
सच है या धोखा है??
मुझे तुमसे है तो तुम्हे किसी और से,
देख मेरा इश्क़ कितना अनोखा है।।
कुछ पाने की उम्मीद ना है,
फिर भी तुझे पाने का ये डर कैसा है,
लगता नही अब तलक तेरे बिन,
कहीं मेरे जिस्म में तू रूह के जैसा है।।
लबों पर ख़ामोशी है कैसी "चौहान",
ये दिल मे मचा कैसा कोहराम है,
तू पुछती है मुझसे,
कैसा ये प्यार है,
सच है या धोखा है??
मुझे तुमसे है तो तुम्हे किसी और से,
देख मेरा इश्क़ कितना अनोखा है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
Superrr chauhan
ReplyDeleteTHANKS ALOT BRO
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