Sunday, 9 September 2018

"तुमसे शिकायत" (TUMSE SHIKAYAT)


तुमसे शिकायत है कि तुम हमे मिलते नही,
हाँ ये दर्द अकेले मुझसे अब संभलते नही।।

इस नींद को बोले दे आना है तो बस जाए ना कभी,
खुली आँखों के ये ख़्वाब अब हमसे पलते नही।।

खामोशी की लगाम रखना अपने जज़बातों पर,
ये घोड़े ख्यालातों के हक़ीक़त में चलते नही ।।

जाओ कोई उन्हें सुना दो गर्जना इन बादलों की ,
जो ये सोच कर बैठे है गर्ज़ने वाले कभी बरसते नही ।।

फिर कैसे काले पड़ गए पन्ने मेरी इस किताब के ,
'गर वो सच कहते है कि वो अब इसे पढ़ते नही ।।

ले आओ उन्हें भी आज कब्र पर मेरी "चौहान" ,
जो कहते है इश्क़ करने वाले कभी मरते नही ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।




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