Wednesday, 26 September 2018

"फ़र्क तब पड़ेगा" (FARK TAB PADEGA)


मुहोब्बत आज हमें है तुमसे,
जब कभी तुम्हे किसी से होगी,
फर्क तब पड़ेगा।।
गुज़ार लेंगे हम तो ज़िन्दगी तेरे इंतज़ार में
जब राह तुम किसी की देखोगी,
फर्क तब पड़ेगा।।
हम तो कर लेंगे दोस्ती तन्हाई से अपनी,
बेचैन रात भर जब तुम रहोगी,
फर्क तब पड़ेगा।।
निभा लेंगे रिश्ता खामोशी से भी अपना,
बातें तस्वीरों से जब तुम करोगी
फर्क तब पड़ेगा।।
कोई गिला नही मुझे बर्ताव से तेरे
जब कोई तुझसे बात तेरे लहज़े में करेगा,
फर्क तब पड़ेगा।।
ज़रूरत अपनी अपनी है इश्क़ यहाँ,
जब ज़िन्दगी कोई तुम्हारी बनेगा
फर्क तब पड़ेगा।।
मैं तो चल दिया तेरे बिछाये अंगारों पर भी,
चलना इश्क़ की राह में जब तुझे पड़ेगा,
फर्क तब पड़ेगा।।
क्या हुआ आज गम तेरे चाहत है हमारी,
जब हसरत किसी के गम की तू करेगा
फर्क तब पड़ेगा।।
कभी कोई शिकायत हुई ही नही तुझसे,
जब शिकायतें कोई तेरी बनेगा,
फर्क तब पड़ेगा।।
कबुल है हँस कर हमें तेरे दिए ज़ख़्म,
मरहम जब कोई तेरा बनेगा,
फर्क तब पड़ेगा।।
माना के आज तुम्हे कोई फर्क नही पड़ता,
जब दुनिया मे "चौहान" ना रहेगा ,
फर्क तब पड़ेगा।।


शुभम् सिंह चौहान,
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


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