मुझे इंतज़ार रहेगा उस शाम का ...
जिस पल तेरे हाथों में हाथ मेरा होगा,
तेरे चेहरे के नूर सा सवेरा होगा ...
शामे गुज़रेंगी तेरे आगोश में मेरी ,
मेरे चहरे को तेरी ज़ुल्फ़ों ने घेरा होगा ...
पहरों तेरा दीदार होगा ,
इश्क़ का नया रंग नया खुमार होगा ..
तेरा दिल भी जब मेरे लिए बेक़रार होगा,
मेरी एक झलक का ये तलब्दार होगा ...
काली घनी रात में ना वो चाँद अकेला होगा ,
ना तेरे लबों पर ख़ामोशी होगी ,ना ये तन्हाईयों का मेला होगा ....
मुझे इंतज़ार रहेगा उस शाम का ....
जब तेरे हाथों की मेहँदी का रंग गहरा होगा ,
जब तेरा मेरी बाँहों में नया सवेरा होगा ..
जब पहन के आएगी तू लाल रंग का जोड़ा "चौहान" के नाम का ,
मुझे इंतज़ार रहेगा उस शाम का ....
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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