ना ये दर्द होते , ना ये गम होते ,
अगर मेरी ज़िंदगी में तुम ना आए होते...
ना रोती ये आँखें ना तरसती तेरी एक झलक को ,
अगर कभी तुमसे हमने नैन ना लड़ाए होते...
ना सुलगता ये दिल का आँगन, ना होता तन्हाइयों का आलम,
अगर कभी तुमसे हमने दिल ना लगाए होते ..
ना होते ये जज़्बात ,ना होते ये ख्यालात ,
अगर तेरे इश्क़ में ख़ुद को ना लुटाये होते ..
ना बनाता "चौहान" "मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ"
अगर रोग तेरे इश्क़ का यूँ लगाए ना होते ..
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां

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