Thursday, 12 October 2017

"बदल सा गया हूँ " (BADAL SA GYA HOON)


जब से तेरी चाहतों में ढल गया हूँ मैं ,
सब मुझसे कहते है की बदल गया हूँ मैं ....

कोई और ख्वाईश ना की खुदा से तुझे देखने के बाद ,
आज तुझे पाने को कितना मचल गया हूँ मैं ...

कौन करेगा इंतज़ार मुहोब्बत में इतना ,
तु आ के देख वक़्त की आग में कितना जल गया हूँ में..

क्या लिखे "चौहान" पैग़ाम-ए- मुहोब्बत,
फुर्सत मिले तो देखना शाम के सूरज की तरह ढल गया हूँ में...

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां 

No comments:

Post a Comment

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...