जब से तेरी चाहतों में ढल गया हूँ मैं ,
सब मुझसे कहते है की बदल गया हूँ मैं ....
कोई और ख्वाईश ना की खुदा से तुझे देखने के बाद ,
आज तुझे पाने को कितना मचल गया हूँ मैं ...
कौन करेगा इंतज़ार मुहोब्बत में इतना ,
तु आ के देख वक़्त की आग में कितना जल गया हूँ में..
क्या लिखे "चौहान" पैग़ाम-ए- मुहोब्बत,
फुर्सत मिले तो देखना शाम के सूरज की तरह ढल गया हूँ में...
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां

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