आज भी तुम्हे याद तो आता होगा ,
हर एक पल हर एक वो लम्हा ...
मिलने की बेकरारी दिन में और ,
रातें तन्हा तन्हा ...
आज भी तुम्हे याद तो आता होगा ...
वो मुझसे यूँ छुप छुप के मिलना ,
मेरे हाथों को थामे संग संग चलना ,
सावन की पहली बारिश में मेरे संग भीगना ,
आज भी तुम्हे याद तो आता होगा ...
वो तेरा दिन भर का इंतज़ार ,
वो बेफ़िक्री में छुपा हुआ प्यार ,
वो शाम को मीठी सी तकरार ,
आज भी तुम्हे याद तो आता होगा ...
वो मेरी बाजुओं में सिमटना,
वो तेरा मुझसे यूँ लिपटना ,
वो रात भर मिलने को तड़पना,
आज भी तुम्हे याद तो आता होगा ...
वो तेरे लबों को छूकर निकालता मेरा नाम ,
वो तेरे इश्क़ में ढलती मेरी हर शाम ,
वो चौहान की कलम से लिखा इश्क़-ए-पैगाम,
आज भी तुम्हे याद तो आता होगा ...
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां

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