Monday, 23 September 2019

"शिक्षा कहाँ है" (SHIKSHA KAHAN HAI)


शिक्षा कहाँ मिल रही है इस दौर में,
बस एक गौरखधंधा चल रहा है।।

होड़ लगी है बस पैसा कमाने की,
कोई बताएगा शिक्षा स्तर कहाँ बढ़ रहा है।।

किताबे बढ़ गयी है ज्ञान खो गया है,
नन्हीं सी उम्र में वो कितना वजन ढो रहा है।।

अगर ट्यूशन और कोचिंग में पढ़ाई है,
तो फिर स्कूलों में क्या हो रहा है।।

रेस लगी है हर चीज़ में आगे आने की,
नही देखते बच्चे का बचपन खो रहा है।।

विज्ञान की तररकी में कैद है सब,
पार्क मैदान सब सुनसान हो रहा है।।

हर चीज़ में आगे लाने की कोशिश में,
भविष्य छोड़ो वर्तमान भी खो रहा है।।

नही समझ आती ये कैसा विकास है,
सुकून मिट रहा है बचपन खो रहा है।।

हालात देख अब तो हँसी आती है "चौहान",
जमाना खुद अपनी कब्र खोद कर सो रहा है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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