थाम कभी हाथ मेरे , बैठ मेरे पहलू में,
बीत जाने दे इस शाम को ,यूँ हाथो में हाथ धरे।।
आने दे कुछ ख्यालों को ,जहन में मुझको लेकर,
होने दे अब कुछ तो प्यार के वो पौधे हरे।।
रात की तन्हाई में मुझे साथ रखना तू,
देखेगा सारा जहाँ उस चाँद को तेरे क़दमो में गिरे।।
छाने दे तस्सवुर प्यार का इस रात में,
होने दे मदहोशी उन प्यालों से जो तेरी आँखों से भरे।।
इस हाथ को थाम कर यूँ छोड़ना नही,
तेरे बिन होंगे "चौहान" के रास्ते गमों से भरे।।
मेरी कलम से बयां मेरे दिल की वो ज़ुबाँ नही,
जो तुझे खुदा तो माने पर सजदा ना करे।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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