ये चंद लफ्ज़ो में लिपटी हुई बातें है,
पढ़ सके तो तू मेरी आँखों मे पढले।।
ज़िन्दगी के हर सफर में मैं साथ हूँ तेरे,
चाहे रास्ते आसान मुश्किल कैसे भी निकले।।
नही डगमगाने देंगे कदम दो पल को भी तेरे,
यकीन कर ये हाथ थाम कर तो देखले।।
जोगी बना फिरता हूँ तेरे इश्क़ में मैं,
तेरे दिल के किसी कोने में ही रखले।।
माना मेरा प्यार तेरी चाहतों के काबिल नही,
पर आज के दौर की जरूरत समझ ही रखले।।
तेरे लिए मर मिटने की जो तलब है,
इसे प्यार नही तो बस हिफाज़त समझ ले।।
नही बदलता "चौहान" लोगों को देख अपने इरादे,
चाहे इससे फिर तू ज़िद्द या फिर हिमाक़त समझ ले।।
मेरी कलम से लिखा हर लफ्ज़ गवाह है मेरी तन्हाई का,
तुझबिन कैसे जीत हूँ इससे रात खुद ढलकर देख ले।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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