Wednesday, 18 September 2019

"कितनी मुहोब्बते" (KITNI MUHOBBATEN)


कोई तराज़ू होता तो तोल के दिखता,
लफ्जों से बयां होता तो बोल के बताता,
मैं राज़ दिल के सारे तुझको सुनता,
कितनी मुहोब्बते तुमसे है तुम्हे आज मैं बताता।।

तेरा पास आना ,मुझमे सामना,
पल भर को ये दूरी सताना,
आज भी ज़िंदा है आँखो में मेरी,
थोड़ा वक्त देते तो हक़ीक़त बनाता,
कितनी मुहोब्बते तुमसे है तुम्हे आज मैं बताता।।

चाँद तारे मैं ला ना सका पर,
आसमाँ जुगनुओं से सजाया तेरा,
जहाँ जहाँ तेरे कदम पड़े वो राह,
हमने फूलों से सजाया तेरा,
सब कुछ तो तेरा था तू कभी हक तो जताता,
कितनी मुहोब्बते तुमसे है तुम्हे आज मैं बताता।।

लफ्ज़ काग़ज़ों पर धुँधला गए है,
बादल तनहाईयो के छा गए है,
मैं फ़क़त लौट के भी चला आता,
वो कब्र पर आ एक आवाज़ तो लगता ,
कितनी मुहोब्बते तुमसे है तुम्हे आज मैं बताता।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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