Friday, 20 September 2019

"हिस्सेदारी" (HISSEDARI)


सोया तो मैं भी नही हूँ उन रातों में,
जो राते तूने जाग कर गुज़री है।।

कभी महसूस ना होने दिया किसी को,
अश्कों से अपनी भी पुरानी यारी है।।

अकेले जज़्बात तेरे दिल मे ही तो नही,
इस मुहोब्बत में मेरी भी हिस्सेदारी है।।

जो मुझे तुझमे ढूंढती है पागलों की तरह,
वो तेरे ख़ातिर मेरे इश्क़ की ख़ुमारी है।।

मत आज़माया करो बात बात पर रिश्तों को तुम,
आज़माइश में लोगो मे रिश्तों में जान तक हारी है।।

एक अलग सी मुहोब्बत हो गयी है कलम से मेरी,
दर्दों को बयाँ करते लफ्ज़ो में अजब सी बेक़रारी है।।

चलते चलते दो कदम गिर क्या गया जमाने वालो,
"चौहान" ने चलना सीखा है मत समझो हिम्मत हारी है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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