Friday, 27 September 2019

"हालात" (HAALAAT)


मत आ लौट के यहाँ हालात अच्छे नही है,
लोग भी अब पहले जितने सच्चे नही है।।

जो पहले हुआ करते थे अब वैसे साथ नही है,
बड़े बूढो में भी अब तज़ुर्बे वाली बात नही है।।

अब किसी के दिल मे कोई भाव उपकार नही है,
जो पहले मिलते थे यहाँ अब वो संस्कार नही है।।

बच्चो में भी कोई खास तहज़ीब, लियाक़त नही है,
चहरे पर नक़ाब है अब किसी मे शराफत नही है।।

बुराई की हुकूमत है कहीं दिखती अच्छाई नही है,
लाश कांधे है इंसानियत की अभी दफनाई नही है।।

देवी कहकर पूजते है पर नारी का सम्मान नही है,
सब बने फिरते हैवान है बचा कोई इंसान नही है।।

जिस्मों के भूखे है अब वो सच्चा प्यार नही है,
पैसों के रिश्ते है भाई-भाई वाला व्यवहार नही है।।

कला का भी अब मिलता कोई मोल नही है,
लफ्ज़ो का भी कब कोई तराज़ू तोल नही है।।

माँ बाप का भी अब उतना सम्मान नही है,
नरभक्ष लोग है अब यहाँ भगवान नही है।।

अब बातों में "चौहान" पहले जैसी सीख नही है,
मत आ लौट के यहाँ अब हालात ठीक नही है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

3 comments:

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...