Friday, 16 August 2019

"ठीक हूँ" (THEEK HUN)


मुझे समुंदर नही बनना मैं दरिया ही ठीक हूँ,
रौशनी तुझ जैसी है तो मैं अँधेरा ही ठीक हूँ।।

क्या फायदा सागर का जो प्यास ही ना बुझा सके,
ज़मी के काम आ जाऊंगा मैं कतरा ही ठीक हूँ।।

वो झूठे फरेबी होकर नसीहत देते है वफ़ा की सच की,
अगर यहाँ अच्छे तुझसे है तो मैं बुरा ही ठीक हूँ।।

मुहोब्बत एक एहसास है इसे बारहां बताया नही जाता,
अगर यकीन ही दिलाना पड़े तो मैं अकेला ही ठीक हूँ।।

मंज़िलें हसीन थी उन रास्तों की जिनपर मैं चला था पर,
किसी का वजूद मिटाना पड़े तो मैं मुसाफ़िर ही ठीक हूँ।।

माफ़ी गलतियों की होती है "चौहान" फ़रेब धोखे की नही,
याराना तुझसा है तो फिर मैं मेरे फ़सानो में ही ठीक हूँ।।

वक़्त पड़े तो याद कर लेना मेरी कही उन बातों को ज़रा,
हाँ तुझे बेगाना कर दिया है और मैं बेगाना ही ठीक हूँ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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