चुप , खामोश, शोर ना करो मेरा देश सो रहा है,
आओ आज तुम्हे नए भारत से मिलवाते है।।
सही है या गलत जो हो रहा है सब जानते है,
नज़र सब आता है बस खुद को अंधा दिखाते है।।
वैसे तो हिंदी भाषा है हमारी, पर शर्मशार है,
रुतबा तो लोग अंग्रेजी बोलकर दिखाते है।।
खेल तो राष्ट्रीय हॉकी है हमारा बरसों से,
पैसा शोहरत तो बस क्रिकेट वाले ही कमाते है।।
अनेकता में एकता का प्रतीक है यूँ तो मगर,
कभी धर्म कभी जात पर अक्सर लड़ जाते है।।
कोई खेतों में तो कोई जंग-ए-मैदान में मर रहा है,
बाँट के लाख रुपये सियासती खेल खेल जाते है।।
धरती को, भारत को माँ कहकर पूजते है लोग यहाँ,
इन्ही सड़को पर बलात्कार ,कत्ल-ए-आम देखे जाते है।।
वो गरीब के घर रोटी भी खा लेता है चुनावी दौर में,
वो अलग बात है खाना बर्तन सब साथ लेकर आते है।।
धर्म के नाम पर यहां इंसान ही नही जानवर भी बाटे जाते है,
गाय हिंदूओं की हो रही है, क्यों बकरे मुसलमानो के धर्म मे आते है।।
बात कानून की करो तो ये भी बस सब्र आज़माते है,
लोग कब्र तक पहुच जाते है पर फैसले ना हो पाते है।।
एक जगह थी जहाँ सिर झुका कर सुकून मिलता था,
वहाँ भी किस्से बाबरी मस्जिद और राम मंदिर के पाते है।।
एक गरीब है कि फुटपाथ पर सोकर भी खुश रहता है,
एक लाखों कमा कर भी चैन से ना सो पाता है।।
बड़ा सच दिखता है आजकल खबरों अखबारों में,
कुछ देर करके बहस अपनी जेबें भर के चले जाते है।।
क्या फर्क पड़ता है कोई खबर ज़रूरी दिखाए या ना भी दिखाए तो,
ज़रूरी है आवाम के लिए जो भारत की हार के कारण पूछे जाते है।।
कुर्बानियाँ कौन याद रखता है "चौहान" बलिदान देश की ख़ातिर,
यहाँ तो किताबो में आज भी चरखे से देश आजाद करवाये जाते है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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ReplyDeleteFabulous lines ..Jai Hind🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
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