मैं फिर लौट आया हूँ,
खामोशियों को आवाज़ बनाने,
दर्दों को लफ़्ज़ों में पिरोने,
मैं फिर लौट लौट आया हूँ।।
गमों से फिर ये दूरी कैसी,
खुशियों से जी हज़ूरी कैसी,
ज़ख़्मो को नासूर बनाने,
मैं फिर लौट आया हूँ।।
टूटे दिलों का साज़ बन,
बेजुबाँ की आवाज़ बन,
मातम इश्क़ का मनाने,
मैं फिर लौट आया हूँ।।
अब गिरते अश्क़ों का क्या,
टुटे बिखरे ख़्वाबों का क्या,
अरमानो की चिता जलाने,
मैं फिर लौट आया हूँ।।
भूल गए जो तुम याद पुरानी,
कुछ किस्से कोई कहानी,
अब सब तुमको याद दिलाने,
मैं फिर लौट आया हूँ।।
अब लिखा रुला देगा तुम्हे,
हर एक लफ्ज़ तड़पा देगा तुम्हे,
मेरी कलम को दिल की ज़ुबाँ बनाने,
"चौहान", मैं फिर लौट आया हूँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Nice....����
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteToo awesome Bhai ❤️
ReplyDeleteThanks bro 😍😍
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