रिश्ते बनता नहीं वो,
जिनको निभाता नहीं ,
यारी में जान कुर्बान पर,
उम्मीद किसी से मेरी अब ज़्यादा नहीं !!
स्वार्थी लोगों से रखने लगा हूँ दुरी ,
ये ज़िंदगी एक शतरंज ,
हारु या जीतूं कोई गम नहीं ,
बनना हैं राजा मुझे,
इस खेल का पियादा नहीं !!
जंग है मेरी खुद से ,
रुकना मुझे आता नहीं,
पाना है मंज़िल को ,
चाहे वो आज मिले या फिर कल,
कठिनाइयों से भागने का मेरा कोई इरादा नहीं!!
ख़ामोशी का चोला हूँ ओढ़ के बैठा ,
जुबानों से ठगना , ठगना मुझे आता नहीं ,
"नाथ" तेरी लगन मे मगन हो गया ,
"चौहान" बुरा किसी चाहता नहीं !!
अब तुझपर है विश्वास कर लिया,
घमंड मुझे तेरे साथ का है,
और मुझे कुछ आता नहीं !!
By : shubham singh Chauhan
Meri kalam - dil ki zubaa'n

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