जब तलक साँसें है ,तेरे इश्क़ का मुझ पर ख़ुमार रहेगा,
तुम मिलो ना मिलो बात अलग है, मुझे मरने तक तेरा इंतज़ार रहेगा!!
क्या है बेबसी क्या है ये आलम तन्हाई का तुम क्या जानो,
तेरी यादों में अब तो दिन रात युहीं जीना दुश्वार रहेगा !!
कौन करेगा तुमसे मुहोबत मेरे जितनी मेरे बाद ,
मेरे मरने तलक तुमसे ये प्यार युहीं बेशुमार रहेगा!!
दुनिया पढ़ लेती है हाव-भाव चहरे के एक वक़्त के बाद ,
तेरी खामोशियों को पढ़ने का ये सिलसिला युहीं बरक़रार रहेगा!!
कहाँ होगी फिर वो जज़्बात मेरे दिल से निकले उन अल्फ़ाज़ों में,
कहाँ फिर "चौहान" जज़्बात-ए-इश्क़ से कोई इख़्तियार रहेगा !!
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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