खोल किताब तेरे दिल की देख और पलट के देख कुछ पन्नो को,
धुंधलाया हुआ एक पन्ना मेरे नाम का भी होगा !!
मिटे हुए उन अक्ष्रों में कहीं कुछ बचा हुआ ,
एक अधूरा सा अक्षर मेरे नाम का भी होगा !!
खामोश लबों पर आ के ठहरा हुआ वो ,
आँखों से बहता आसूं मेरे नाम का भी होगा !!
तेरी हिफाज़त में चलता हुआ तेरे साथ ,
तेरे साए में छुपा हुआ अक्ष मेरा भी होगा !!
काली घनी रात में तेरे जहन में बसा हुआ,
एक छोटा सा ख़्याल मेरा भी होगा !!
माना के आज दूर सही हम पर पढ़ते हुए" मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ" ,
"चौहान "का एहसास करता हर एक अल्फ़ाज़ मेरे नाम का होगा !!
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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