ये किस्से ठीक है जैसे भी है ,
तुम्हारे अपने है मुझे मत सुनाओ।।
अपने ज़ख्मों का मरहम खुद बनो,
किसी और को ज़ख्म ना दिखाओ।।
मतलबी दुनिया यहाँ कौन किसका है,
ये ज़िंदगी कीमती है गैरों पर ना लुटाओ।।
इश्क़ कहाँ अब यहाँ चालसाज़ियाँ है,
अब भी वक़्त है वक़्त पर संभल जाओ।।
क्या हुआ गर मैं हाल-ए-दिल लिखता हूं ,
अजनबी ठीक हूँ मेरे करीब ना आओ।।
अच्छा है मेरी ज़ुबाँ तुम्हे समझ नही आती,
शायरों की बात है सुनो और भूल जाओ।।
मेरी कविताओं को मेरा हाल ना समझो ,
मैं खुश हूँ यहाँ तुम अपना हाल बताओ।।
एक खुशबू है जो "चौहान" को फिर ज़िंदा कर रही है,
वक़्त मिले तो कभी कब्र से मेरी वो फूल हटा जाओ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

अच्छा है मेरी ज़ुबाँ तुम्हे समझ नही आती,
ReplyDeleteशायरों की बात है सुनो और भूल जाओ. Excellent work Bhai 💓💓💓💓
👍👌👌👌
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteWaaah bhai subham maan gye tne
ReplyDeleteThanks dear 😍😍😍
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