Sunday, 26 January 2020

"क्या ऐसा"KYA AISA)



क्या ऐसा नही हो सकता,
हम फिर किसी राह पर मिल जाये,
अनजान बनकर ही सही,
बस एक दुजे को दिख ही जाये
ये फासले दूरियां युहीं बरकरार रख,
क्या ऐसा नही हो सकता,
फिर वजूद हम दोनों के इस जहाँ में हो जाये,
क्या ऐसा नही हो सकता....
मैं खुदा तुझसे कोई तिज़ारत नही माँगता,
कैसे करने है सज़दे ये इबादत नही जानता,
मंज़िल ना मिले कोई बात नही,
ख़्वाबों का शहर मेरा शमशान ही सही,
क्या ऐसा नही हो सकता,
हम एक रास्ते के मुसाफ़िर हो जाये,
क्या ऐसा नही हो सकता...
कोई खुशियों की दौलत ना दे,
कोई हुनर कोई शोहरत ना दे,
ना दे चाहे अल्फ़ाज़ कोई कलम को मेरी,
जिसे लिखता है "चौहान"उसे देखने की मोहलत दे दे,
क्या ऐसा नही हो सकता.....


शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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