तेरी किताब ,तेरी कहानी,
हम किरदार,
हम मिट्टी बेमोल से,
तू शिल्पकार,
तेरे रंग ,हम तस्वीर,
तू चित्रकार,
सब तेरी मर्ज़ी का था कहानी में तेरी,
वक़्त पड़ा तो अच्छा दिखाया,
वक़्त गया तो बेकार....
थोड़ा सोच संभल के चल "चौहान",
हर कहीं तो अच्छा नही तू,
किसी और कि कहानी में फिर,
तेरा भी है एक क़िरदार।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

No comments:
Post a Comment