अगर तेरी हाँ में हामी नही भरता,
सच मैं कुछ गलत नही करता।।
इश्क़ में हद से नही गुज़रता,
सच मैं कुछ गलत नही करता।।
हर किसी की अपनी सोच है,
हर किसी का अपना नज़रिया है,
किसी की बातों में आकर,
मैं अगर रास्ता नही बदलता,
सच मैं कुछ गलत नही करता।।
तुझे अपना समझ खुदा बनाया,
तूने करके दगा जब सब गवाया,
आज अगर मैं तुझसे बात नही करता,
आज अगर तुझसे मुलाक़ात नही करता,
सच मैं कुछ गलत नही करता।।
हाँ मैं औरों की तरहा बेफ़िक्र नही हूँ,
अनजान हूँ किसी के ज़िक्र में नही हूँ,
हाँ हकीकत में दूरियाँ है अब दरमियान,
मैं दूरी कम करने की कोशिश नही करता,
सच मैं कुछ गलत नही करता।।
जिस्म में रूह सा समाया था तुझे,
इश्क़ में अपना मुर्शद बनाया था तुझे,
अब "चौहान" पत्थरों पर नही झुकता,
सच मैं कुछ गलत नही करता।।
इस आसमाँ में हम और तुम थे कभी,
ना जाने कितने मौसम गुज़रे थे यही,
पर जो हर किसी के साथ उड़ जाए,
"चौहान" ऐसे परिंदों के साथ नही उड़ता,
सच मैं कुछ गलत नही करता।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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ReplyDeleteThanks bro 😍😍😍😍😍
Deletevery good poem
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DeleteNice 👌👌👌👌👌👌👌
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DeleteAhaan very nice
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