बड़ी ख़्वाईश बड़े अरमान थे उसे अपना बनाने के,
उसे अगर मेरा होना ही नही था तो क्या हुआ।।
लिखकर कहकर हर तरीके से तो बताए थे मैंने,
जज़्बात मेरे उसे समझ आये ही नही तो क्या हुआ।।
घर ,आँगन ,गालियां तक सजाई थी राह में उसके,
वो मेरी गली से कभी आये ही नही तो क्या हुआ।।
रोये भी थे जी भर के उससे दूरी की तड़प में,
उसे आँसू मेरे कभी नज़र आये ही नही तो क्या हुआ।।
उसे भी पता है किस हाल से गुज़र रहे है हम,
वो कभी पूछने आये ही नही तो क्या हुआ।।
ना जाने कितनी लाशें दफन है ख़्वाईशो की,
एक लाश और दफन हो जाएगी तो क्या हुआ।।
कभी मेरे हाल में मेरा ना हो सका आज अगर,
मेरी कब्र से लिपट कर रो भी लिया तो क्या हुआ।।
ताह उम्र करता रहा जिसका जिक्र "मेरी कलम दिल की ज़ुबाँ" में,
आज मेरी कब्र पर बैठ कर वो पूरी क़िताब पढ़ भी लेगा तो क्या हुआ।।
मैं अब कभी लौट के ना सकूँगा उसके इस जहाँ में "चौहान",
अब वो इबादत सज़दे उपवास रोज़े कर भी लगा तो क्या हुआ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

No word brother 💓उसे भी पता है किस हाल से गुज़र रहे है हम,
ReplyDeleteवो कभी पूछने आये ही नही तो क्या हुआ।।
Beautiful lines ��
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteAhaan superb lines bro
ReplyDeleteThanks bbro 😍😍
Deleteसच में बहुत अच्छी lines 👌👌👌👌 है no Wards for this
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