मैं कहाँ कहाँ तक जाऊँ ,
एक तेरी तालश मे,
कब तक पहने फिरूँ,
हँसी का नक़ाब मैं,
क्या ऐसा होगा कोई रात सो कर गुज़ार दूँ,
यूँ राते रो रो कर कबतक बिताऊँ मैं,
टूट चुका हूँ तेरे जाने के बाद,
इन हालातों से कितना लड़ के दिखाऊँ मैं,
नही फर्क पड़ता कौन क्या बोलेगा,
तू क्या था मेरे ख़ातिर,
क्यूँ किसी को समझाऊँ मैं,
इसी त्योहार मिला था तू आखिरी बार,
अब मिलने की उम्मीद किससे लगाऊँ मैं,
ना जाने किन किन रास्तों में भटक गया,
कोई राह बता तुझे भूल जाऊँ मैं,
जश्न खुशी हँसी सब ले गया तू,
आ कभी तुझे सबके हाल बताऊँ मैं,
बड़ा बेफिक्र हूँ मैं सब सोचते है,
परेशानी अपनी किसे सुनाऊँ मैं,
अब लिखकर भी आराम नही मिलता,
इन ज़ख्मो को कितना कुरेदता जाऊँ मैं,
तेरी खता गलतियाँ सब माफ,
बस एक वादा निभाने आजा,
अब तस्वीरों से दिल नही भरता,
हो सके तो लौट के आजा,
तुझे जी भर के सीने से लगाऊँ मैं,
फिर चले जाना मैं रोकूंगा नही,
बस इतना कर दे "चौहान"
खुद से नज़रें मिला पाऊँ मैं।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Emptiness....
ReplyDeleteHmmm 😔😔😔😔
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