बड़ी बेफ़िक्र सी है वो हसरते पूरी दिल की करती है,
एक लड़की है जो मेरी कविताओं में खुलकर जीती है।।
थोड़ी बेबाक थोड़ी चंचल थोड़ी मासूम सी है,
जामने की बातों पर नही अपने इरादों पर जीती है।।
किसी की सोच नज़रिए से फर्क नही पड़ता उसको,
अपने असूलों की है अपने असूलों पर जीती है।।
जो मन आया वो पहनती है नज़रे सबकी भाँपती है,
गीदड़ भेड़ियों के झुंड में भी वो शेर सी रहती है।।
जमाने की तरह पीठ पीछे ज़हर नही घोलती वो,
हाँ मुँहफट है थोड़ी जो भी बोलती है मुँह पर बोलती है।।
फिर तुम्हे अच्छा लगे या ना लगे रवैया उसका,
जमाने की तरह लाखों चहरे नही रखती है।।
क्यों बदलना है उसे जमाने के खोंखले रिवाज़ों के आगे,
दरिया सी है वो "चौहान" अपनी मौज में बहती है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Kon hai vo....jida naam mohobbat ....
ReplyDeleteएक ख़्वाब ख़्वाब रहने दो,
Deleteअभी रुख पर नक़ाब रहने दो ।।
Wow amazing lines 👌👌👌👌👌👍👍👏👏👏😍
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteNice lines ��
ReplyDeleteThanks 😍😍
DeleteAcha bhai ji.. Aise hai ek ladki...
ReplyDeleteLines achi h Or feeling b