Thursday, 18 October 2018

"रावण" (RAVANN)


हाँ मुझे राम नही रावण बनना है,
अहम की ख़ातिर मुझे भी मरना है।।

पूजा भी करनी है तो जाप मुझे भी करना है,
हदों में रहकर थोड़ा पाप मुझे भी करना है।।

हाँ गुमान नही करना मुझे कामियाबी पर मेरी,
आन की ख़ातिर तो मंज़ूर भगवान से भी लड़ना है।।

अटल रहना है मुझे इरादों पर अपने ,
वक़्त पड़े तो तांडव फिर मुझे भी करना है।।

जाना नही है वापिस मुड़कर अंज़ाम अपना देखकर,
मरना है तो फिर अपने इरादों पर डंटकर मरना है।।

एक सोच बनकर उतर जाना है जहन में लोगो के,
फिर एक रिवाज़ सा बनकर मुझे हर साल जलना है।।

बुरा हूँ या बुरा नही ये सोच लोगों की है मेरे लिए,
अधर्मी अहंकारी सही पर "रावण" सा ज्ञानी भी बनना है।।

अच्छे बुरे का फ़र्क हो तो कोई भी पहचान ले "चौहान",
मुश्किल तो इस दौर में बुरे से बुरे में फर्क करना है।।


शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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