Wednesday, 10 October 2018

"माँ सब जानती है" (MAA SAB JANTI HAI)


खूबियाँ भी जानती है खामियां भी,
हँसी भी पहचानती है उदासियाँ भी,
बिन बोले समझ जाती है मेरे दिल का हाल,
माँ मेरी सब जानती है।।

वो रातों को ना सोना,
मेरा छुपछुप कर रोना,
चालाकियां भी समझती है ,
मासूमियत भी पहचानती है,
बिन बोले समझ जाती है मेरे दिल का हाल,
माँ मेरी सब जानती है।।

शरारतें भी जानती है मेरी शराफ़त भी,
बदतमीजियां भी , मेरी लियाक़त भी,
मेरे ख़्वाबों में जीती है खुद को,
हकीक़त भी पहचानती है,
बिन बोले समझ जाती है मेरे दिल का हाल,
माँ मेरी सब जानती है।।

यूँ तो भोली है थोड़ी अनपढ़ भी है,
पर ज़िन्दगी की किताब पढ़ाती है,
सिखाती है मुझे सलीका जीने का,
ज़माने के आव-भाव सब पहचानती है,
बिन बोले समझ जाती है मेरे दिल का हाल,
माँ मेरी सब जानती है।।

मेरी बेफिक्री का नाटक भी करती है कभी कभी,
एक उमदा अदाकार भी है,
थोड़ी भी सिकन नही लाती माथे पर अपने,
क्या कहूँ कलाकार भी है,
दिन रात रब से मेरी कामियाबी का मुकाम मांगती है,
बिन बोले समझ जाती है मेरे दिल का हाल,
माँ मेरी सब जानती है।।

सच कहूँ आज कल मंदिर मज़ारों में कम जाता हूँ,
मुसीबतों में साथ हरदम अपनी माँ को पाता हूँ,
बोल नही पता कभी "चौहान" पर ये भी सच है,
रब से उसकी खुशियाँ उसका आराम मांगता हूँ,
मेरी रूह तो ताह उम्र उसे अपने पास मांगती है,
बिन बोले समझ जाती है मेरे दिल का हाल,
माँ मेरी सब जानती है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम -दिल की ज़ुबाँ।।




No comments:

Post a Comment

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...