आ मेरी क़िस्मतों में तेरा नाम लिखूँ,
कुछ ऐसा मुहोब्बत-ए-पैग़ाम लिखूँ,
ना वो वीरानियाँ ना तन्हाईयां हो दरमियाँ,
तेरे नाम एक ऐसी हसीन शाम लिखूँ।।
लिखूँ वो खामोश जज़्बात दिल के ,
लिखूँ वो किस्से इश्क़-ए-महफ़िल के ,
थोड़ी शिकायतें हो थोड़ी मुहोब्बत भी,
आ एक ऐसी तेरी-मेरी मुलाकात लिखूँ।।
आ इन आंखों में कुछ राज़ लिखूँ,
आ इन गीतों के अल्फ़ाज़ लिखूँ,
मिलकर फिर बिछड़ ना सके कभी हम,
आ ऐसी कुछ खुदा-ए-करामात लिखूँ।।
लिखूँ दिल मे धड़कन सा तुझे,
लिखूँ मौसम-ए-सावन सा तुझे,
कैदकर के रख लूं कहीं खुद में "चौहान",
आ इस जिस्म में तुझे जान सा लिखूँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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