हाँ हर बात में कहीं एक बात छुपा कर रखता हूँ,
चहरे की हँसी से अपने हालात छुपा कर रखता हूँ।।
कभी आँखों से आंसू बन बहने ना दिया मैंने,
तेरे दिए घाव कुछ ऐसे सीने से लगा कर रखता हूँ।।
क्या हुआ गर टूट के बिखर गई माला मेरे सपनों की,
मोती तेरी यादों के सीने से लगाकर रखता हुँ।।
क्या हुआ गर ज़िन्दगी रात काली है अमावस की,
दिल के आंगन में अरमानो की लौ जला के रखता हूँ।।
क्या पता कल ये हवाएँ मेरे हक में हो या ना हो,
मुठ्ठी भर सही जेब मे आसमान छुपा कर रखता हूँ।।
राज़ है एक अनकहा कानों में बालियाँ भी मेरे,
सच है नाम में किसी का नाम छुपा कर रखता हूँ।।
ये जो हर वक़्त खिला-खिला सा नज़र आता है "चौहान",
सच कहूँ इस दिल में भी एक शमशान छुपा कर रखता हूँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Superb lines
ReplyDeleteThanks
Deletewaw.... exactly right...👌
ReplyDeleteThanks alot
DeleteHmmm
ReplyDeleteHmmm 😂
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