Tuesday, 28 August 2018

"तुम मत बदलना" (TUM MAT BADALNA)


हवाएँ रुख बदलेंगी तुम मत बदलना,
रहगुज़र ज़िन्दगी की है ज़रा संभालना।।

याद रहना तुम सावन की बारिश की तरहा,
बेमौसम बारिश की तरह तुम मत बरसना।।

माना उम्मीदें हज़ार है आज तुझे इश्क़ में उनसे,
इश्क़ करना बेपनाह पर हद से मत गुज़रना।।

बहुत मसक्कत से पहुचे हो इन ऊंचाइयों पर,
झरने की  तरहां यूँ पल भर में मत बिखरना।।

राख बना खुद को मिटा डाला जिसने तेरी खातिर,
क्या था तेरा "चौहान" में फिर तुम खुद ही परखना।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।





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