Wednesday, 1 August 2018

"ख़्वाब मेरी माँ के" (KHAWAB MERI MAA KE)


जो आंखें रात भर फिक्र में मेरी सोई नही ,
उनमे सुकून की नींदे भर देना ,
ज़्यादा कुछ नही मांगता तुझसे मेरे खुदा,
छोटे-छोटे ख़्वाब हैं मेरी माँ के वो पूरे कर देना।।

जिन हाथों ने पाला है दर्द मेरा हर एक संभाला है,
आज सारे दुख दर्द उसके मुझे दे,
दामन में उसके खुशियां भर देना,
ज़्यादा कुछ नही मांगता तुझसे मेरे खुदा,
छोटे- छोटे ख़्वाब हैं मेरी माँ के वो पूरे कर देना।।

अपने आँचल में जिसने मुझे सुलाया है , भूख मारकर खुद की अपना निवाला मुझे खिलाया है,
उसकी राहों में बारिश फूलों की कर देना,
ज़्यादा कुछ नही मांगता तुझसे मेरे खुदा,
छोटे- छोटे ख़्वाब हैं मेरी माँ के वो पूरे कर देना।।

जिसने आदमी से मुझे इंसान बनाया है , जीने का जिसने सलीका सिखाया है,
उसका सिर ना झुके कभी कुछ ऐसा कर देना,
ज़्यादा कुछ नही मांगता तुझसे मेरे खुदा,
छोटे- छोटे ख़्वाब हैं मेरी माँ के वो पूरे कर देना।।

जो ममता का सार है , हर दर्द में निकलती पुकार है,
स्वरूप भगवान का जो "चौहान" के लिए,
मेरा जीवन अर्पण उसके चरणों मे कर देना,
ज़्यादा कुछ नही मांगता तुझसे मेरे खुदा,
छोटे- छोटे ख़्वाब हैं मेरी माँ के वो पूरे कर देना।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।





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