गर बयाँ कर दिया हाल-ए-दिल कलम से तूने अपनी,
तो क्या है जो इन आंखों में छुपा रखा है।।
क्या ऐसा है जो लिपट गया है तुझे चंदन समझ कर,
किस खुशबू को तूने अपनी साँसों में बसा रखा है।।
कैसी ये तेरी खामोशी है के ख़ामोश होके भी ख़ामोश नही होती,
कौन है वो अब तलक जिसे नज़रों से ज़माने की बचा के रखा है।।
कैसी रहगुज़र है फिर यहाँ 'गर वीरान है वो तेरे दिल शहर,
कौन है वो जिसने तेरे दिल के आशियाने में कोहराम मचा रखा है।।
'गर आसमान का होता तो फिर नज़र आता यहां सबको,
कोई तस्वीर है चाँद की ये जिसको तुमने दीवारों पर लगा रखा है।।
ना होता दर्द कोई तो फिर कब का छोड़ देता लिखना "चौहान",
कोई तो है जिसके खातिर खुद को तूने मिटी में मिला रखा है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Bohot hi lajwab bhai
ReplyDeleteThnakyou bhai 😍😍
DeleteBhut khub
DeleteThnks bro
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