अब लोरी नही गाता कोई ये आंखें रात भर नही सोती,
कैसी होती है ज़िन्दगी उनकी जिनकी माँ नही होती।।
सुनी है चोंखट मेरे घर की ,मेरे आने की अब किसी को फिक्र नही होती,
खुले दरवाज़े आज बंद मिलते है,राह देखती दरवाज़े पर अब माँ नही होती।।
हाल भी अब मेरा कोई नही पूछता, माथे का पसीना दुप्पटे से कोई नही पोंछता,
कोई नही रखता हाथ मेरे सिर पर, किसी को मेरी परेशानियों की भनक नही होती।।
पापा की डाँट से भी कोई नही बचता,चुपके से मेरे हाथ मे पैसे कोई नही दबाता,
नींद से तो माना पहले भी अनबन थी ,पर अब सिर रखने को कोई गोद नही होती।।
अब कोई नही पूछता मुझसे सपने मेरे, अब बेमतलब के मेरे लिए दुआए नही होती,
कोई नही रखता रोज़े उपवास मेरे ख़ातिर, मेरे दर्द में अब कोई आंखें नही रोती।।
सोच कर ही डर लगता है "चौहान",जिनके सिर पर ममता की चादर नही होती,
मेरी माँ को पास मेरे रहने दे ताह उम्र खुदा, हर किसी की चाहत दौलत शोहरत नही होती।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Heart touching..keep it up👍
ReplyDeleteThanks alot 😍😍🙏🙏
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