Monday, 6 August 2018

"मेरी कहानी-मेरा सच" (MERI KAHANI - MERA SACH)


हाँ यूँ तो बहुत दूर आया हूँ मैं,
कुछ रिश्ते करके चकनाचूर आया हूँ मैं ,
ख़्वाबों की चमक ने अंधा कर दिया मुझे,
खुद से थोड़ा होके मग़रूर आया हुँ मैं,
कही किसी का आँचल छोड़ आया ,
कही वो बचपन का आंगन छोड़ आया,
कहीं छोड़ आया फिक्र किसी की आंखों में
कहीं दिल किसी का तोड़ आया हूँ मैं,
हाँ यूँ तो बहुत दूर से आया हूँ मैं....

यूँ तो पहले छोटी छोटी बात पर भी अड़ा हूँ मैं,
क्या कहूँ ख़्वाबों की चाहत में नींद से भी लड़ा हूँ मैं,
समझौता करना तो किसी ने सिखाया ही नही,
घर आने की ख़्वाईश में घर से हो दूर चला हूँ मैं,
हाँ उम्र से पहले हालातों ने बड़ा कर दिया,
गिरने के डर ने आज इन ऊँचाई पर खड़ा कर दिया,
किसी का कर्ज कभी उतार ही नही पाया मैं,
किसी का बन के आज गुरुर आया हूँ मैं,
हाँ यूँ तो बहुत दूर आया हूँ मैं....

रिश्ते बनाये ही नही यहां रिश्ते संभाले भी है मैंने,
दिल को दिलासा दे कुछ वहम भी पाले है मैंने,
ज़िक्र नही करता ज़ुबाँ और कलम से कभी उनका,
जो सोचते है उनसे मतलब अपने निकाले है मैंने,
सलीका जीने का नही बदला अब तलक मैंने,
ज़ख़्मो को अपने बना के नासूर आया हुँ मैं,
दीये बुझ गए है पर टूटे नही मेरे जुनून के,
इन दियों में भरने "चौहान" नूर आया हूँ मैं,
हाँ यूँ तो बहुत दूर आया हूँ मैं ...

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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