मेरे आँगन की तुलसी है तू तो मेरे घर की लक्ष्मी है,
हर भाई के हाथों पर तो तू राखी की पहचान है।।
चुलबुली सी है नटखट भी है वो हम मेरी शान है,
माना कभी कह नही पता पर मेरी बहन मेरी जान है।।
सताता हूँ तो मनाता भी हूँ, रुलाता हूँ तो हँसता भी हूँ,
छोटी है और प्यारी है हाँ मेरा वो मेरा अभिमान है।।
पापा की फटकार से बचाती है कभी छोटी बात से चिढ़ जाती है,
ज़िद्दी तो है वो अपनी चीजों को लेकर पर वो मेरा एकलौता जहान है।।
यूँ तो चिल्लाना उसे सुनाई नही देता कभी मेरा ,पर खामोशी पढ़ जाती है,
दोस्त बन साथ निभाती है कभी वो, मेरा वो गुमान है।।
कभी गलती कर मेरी पीठ पीछे छुप जाती है, कभी अपनी गलती मेरे सिर कर जाती है,
दिखने में तो प्यारी सी है वो ,पर सच कहूं तो बड़ी शैतान है।।
अपनी खुशियों का शहर मुझमे देखती है, हक भी जताती है कभी डर से ना कहती है,
तेरी खुशियों की खातिर तो "चौहान" की जान भी कुर्बान है।।
हर वक़्त तेरे संग खड़ा हूँ मैं,मेरे सिर का तू ताज़ है,
माना कभी कह नही पता पर मेरी बहन मेरी जान है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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