हिसाब अलग है मुहोब्बत का मेरे दोस्त,
कुछ पाना ही नही कुछ खोना भी इश्क़ है ।।
कहाँ लिखा है के नसीब होंगी बस खुशियां,
सिर्फ हँसना ही नही रोना भी इश्क़ है ।।
ज़रूरी तो नही के हासिल हो मुकाम सबको,
मंज़िल की तलाश में चलते रहना भी इश्क़ है।।
सिर्फ जीना ही तो यहाँ ज़िन्दगी नही होती ,
किसी के ख़ातिर मर जाना भी तो इश्क़ है।।
ज़रूरी नही के हर बात यहाँ बोल कर बताई जाए,
कभी कभी आँखों से कह जाना भी इश्क़ है ।।
मिलना ना मिलना तो बात बाद कि है "चौहान",
किसी की इबादत में सज़दे करते रहना भी इश्क़ है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Nice one
ReplyDeleteYou have inborn talent of words sir...Truly commendable, may you reach to the heights ...God bless you!!!
ReplyDeleteayam bangkok vietnam sabung ayam toraja
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