'गर मैं ना रहूँ तो तुम निराश मत होना ,
भर के पानी आंखों में यूँ उदास मत होना।।
कोई ख़्वाब समझ के भुला देना मुझे तुम ,
पर हकीकत की चाह में फिर देर तक मत सोना ।।
कर लेना गिले-शिकवे चाहे ताह उम्र तुम मुझसे,
पर अपने जज़्बातों को कभी खामोशी में मत पिरोना।।
घुल जाना किसी सागर में तुम दरिया की तरहा,
पर सुखी नदी की तरह सूख के पत्थर मत होना ।।
युहीं तोड़ के रखना नाता चाहे तुम मुझसे अपना ,
पर मुझे याद करके कभी अपने अतीत पर मत रोना।।
पढ़ लेना "मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ" जो कभी मन हो मुलाकात का ,
कब्र पर आकर "चौहान" की तुम खुद पर फिर यूँ काबू मत खोना।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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