Wednesday, 29 November 2017

"अब तलक " (AB TALAK)


सिलसिला तुझे चाहने का , अब तलक जारी है ,
यूँ पल पल अश्क़ बहाने का , अब तलक जारी है !!

सिमटी है कई यादें आज भी उन चाँद तारों में,
इन आसुओं का लबों पे रुक जाना , अब तलक जारी है !!

क्या जो डूब गयी कश्ती हमारी आ के किनारे पर ,
जज़्बा साहिल की चाह में तूफानों से टकराने का , अब तलक जारी है !!

किसको तलाश है अब सहरा में गुलिस्तां की ,
तन्हाई में तेरी यादों का सताना अब तलक जारी है !!

कर भी क्या लेंगे "चौहान" लिख कर "मेरी कलम - दिल की जुबां",
पर क्यूँ तेरा अश्क़ों को लफ़ज़ बनाना अब तलक जारी है!!

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां

2 comments:

  1. भूल कर भी ना भूलें पड़ना हम,"मेरी कलम-दिल की जुबां"
    आप लिखते रहें यूंही, हमारा पड़ना भी जारी है।😛
    Nice lines sir

    ReplyDelete

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