रोग पुराना है ये तुम मत लगाना ,
दर्द जाना पहचाना है ये तुम मत लगाना,
हर एक दिल का फ़साना है ये तुम मत लगाना ,
ये तो सदियों पुराना है इसे तुम मत लगाना,
रिश्ता बेगाना है ये तुम मत लगाना,
इस मर्ज़ की ना कोई दवा है ,
ये दिल आशिक़ाना तुम मत लगाना ,
मैंने तो चढ़ा लिया लाल रंग ख़ुद पर ,
ये रंग इश्क़ का "चौहान" तुम मत लगाना...
कहता है ये शायर दीवाना ,
मैं तो संभल ना पाया कश्ती इश्क़ की,
इस दरिया में कहीं तुम भी भटक ना जाना .......
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां

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