कुछ लम्हात पुराने बाकी है तेरे इश्क़ के ,
कुछ ख्यालात पुराने बाकी है तेरे इश्क़ के ,
सुनी आँखों में कुछ सपने है,
कुछ ख्वाब अधूरे है तेरे इश्क़ के ....
चलते थे जिन रास्तों पर हाथों में हाथ थाम,
गुज़री थी जो बाँहों में ढलती हुई शाम ,
देखे तेरे इश्क़ के अंदाज़ जो "चौहान",
कुछ राज़ पुराने बाकी है तेरे इश्क़ के ....
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां

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