हर वक़्त एक चहरा नज़र आएगा ,
दिल हर वक़्त तेरा मुझे बुलाएगा ,
आज दूरियाँ है दरमियान तो क्या ,
एक वक़्त ऐसा भी कभी आएगा ,
एकपल भी तुझसे मेरे बिन जिया ना जाएगा..
अच्छी ना लगेगी वो तन्हा रात चांदनी ,
खामोशियों का साया जब तुझपर मंडराएगा ,
मोहलत ना होगी कुछ कहने की जब ,
मेरा साया तक तुम्हे नज़र ना आएगा ,
एक वक़्त ऐसा भी कभी आएगा ,
एकपल भी तुझसे मेरे बिन जिया ना जाएगा..
वो भीगा सावन भी आग सा जलाएगा ,
तेरा दिल मुझे जब पाने को मचल जायेगा ,
लबों से निकलता जब नाम "चौहान" ही आएगा ,
एक वक़्त ऐसा भी कभी आएगा ,
एकपल भी तुझसे मेरे बिन जिया ना जाएगा..
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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