इन रास्तों को मुकाम चाहिए ,
इन चाहतों को तेरा नाम चाहिए ,
बहुत चला ज़िंदगी की तलाश में ,
अब इस सफर को आराम चाहिए...
इन खामोशियों को आवाज़ चाहिए,
तन्हाइयों को तेरा एहसास चाहिए,
अब नहीं गुज़रता एक पल भी तेरे बिना ,
अब इस सफर को आराम चाहिए ...
लिखने को फिर वही जज़्बात चाहिए ,
ज़िंदगी के हर दौर में तेरा साथ चाहिए ,
मुक्कमल कर दे फ़साना दिल का "चौहान",
अब इस सफर को आराम चाहिए ...
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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