Thursday, 15 October 2020

"चाहत" (CHAHAT)


दिल को तेरी चाहत आज भी है,
तुझको पाने की हसरत आज भी है।।

कुछ इस कदर मुहोब्बत है तुझसे,
इन नींदों को शिकायत मुझसे आज भी है।।

दूर रहना भी अब गवारा नही,
तेरे संग की आदत मुझको आज भी है।।

झुकता है सिर आज भी मंदिर मज़ारों पे,
तुझसे ये इश्क़-ए-इबादत आज भी है।।

अब लिख के भी दिल को आराम नही,
"चौहान" में थोड़ी लियाकत आज भी है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
 

2 comments:

  1. कुछ इस कदर मुहोब्बत है तुझसे,
    इन नींदों को शिकायत मुझसे आज भी है fabulous lines ♥️😍

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